Sunday, 15 May 2016

व्यापार जैसा त्यौहार


'बाजार ने दीवाली को ट्रेड फेयर बना दिया' (13 नवंबर) में संजय कुंदन की बात सटीक लगी। दीवाली पर पूजा का विशेष महत्त्व है, इसी कारण सदियों से दीवाली पर नई-नई वस्तुओं की खरीदारी और अपने प्रियजनों को भेंट देने की परंपरा है। हमारे देश में अधिकांश लीग बचपन से ही पटाखों के साथ दीवाली मनाने का चलन देख रहे हैं, जो अब 'से नो टू क्रैकर्स' अभियान के तहत कुछ कम हो गया है। आज एक आदमी की परचेजिंग पावर बढ़ी है। बढ़ती आमदनी के साथ बाजार को उसे भुनाने का एक सुनहरा मौका भी मिला, जो ज्यादा ही बढ़ गया है। देखा-देखी के चलते, अनचाहे और बेमन से भी गिफ्ट बाजार से जुड़ना पड़ता है। इन बुराइओं के साथ एक और बुराई जुडी जुआ खेलने की। सही मायनों में दीवाली जैसे फेस्टिवल में ख़ुशी चाहिए, तो इन बुराइयों से खुद को दूर करना होगा।


(यह पत्र नवभारत टाइम्स में 16 नवंबर 2013 को प्रकाशित हुआ)