Sunday, 22 May 2016

नोबेल का सन्देश


मलाला यूसुफजई और कैलाश सत्यार्थी को नोबेल पुरस्कार दिए जाने के निर्णय में एक सन्देश छिपा है, जिसे भारत और पाकिस्तान को समझना होगा। दोनों देश एक तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं। पाकिस्तान में आतंकवाद के कारण शिक्षा पर संकट है, तो भारत में गरीबी के कारण बच्चे नही पढ़ पाते। वहां मलाला बेहतर तालीम के लिए संघर्ष कर रही है तो यहां कैलाश बच्चों के अधिकार की लड़ाई के सूत्रधार हैं। दोनों देशों की सरकारों को रक्षा पर बेहिसाब खर्च करने की बजाय बच्चों की शिक्षा पर ज्यादा खर्च करना चाहिए। अगर भारत-पाक के हुकमरान अमन कायम करने में सफल रहे तो इससे बड़ी बात और कुछ नही हो सकती। यही नही, यह विकासशील देशों के लिए एक बड़ी प्रेणना भी बन सकता है।


(यह पत्र नवभारत टाइम्स में 14 अक्टूबर 2014 को प्रकाशित हुआ)