Monday, 9 May 2016

मंहगाई में शॉपिंग


सब इनकम पर निर्भर है। जिसकी जेब में जितना पैसा, उतनी शॉपिंग। पैसे वालों की तो रोज दीवाली है। हमारा फंडा बिलकुल साफ़ है, बचत ज्यादा, शॉपिंग कम।


(यह पत्र नवभारत टाइम्स में 16 अक्टूबर 2012 को प्रकाशित हुआ)