Monday, 16 May 2016

प्याज के आंसू भारी


18 सितम्बर के अंक में संपादकीय 'प्याज और राजकाज' एकदम सही है। प्याज की तासीर रुलाने वाली है। काटो तो आंसू निकल पड़ते हैं। वैसे बाकी सब्ज़ियां और दाल, चावल भी कोई सस्ते नही है, परन्तु गरीब आदमी महंगी सब्ज़ी को छोड़ सकता है। वह सिर्फ प्याज के साथ रोटी खा कर पेट भरता है, जब प्याज की कीमत रुलाने वाली हो जाती है, तो सरकार पर प्याज के आंसू भारी पड़ने लगते हैं। प्याज पर बवाल अगामी चुनावों पर किस, किस को रुलाता है, देखना बाकी है। सरकार को सचेत करके चाहे सब्सडी में सही, सस्ता प्याज उपलब्ध कराना चाहिए।


(यह पत्र नवभारत टाइम्स में 20 सितम्बर 2013 को प्रकाशित हुआ)