Thursday, 12 May 2016

आरोप लगाने से क्या होगा


अरविंद केजरीवाल द्वारा किए गए ब्लैक मनी खुलासे के बाद आम आदमी यह सोच रहा है कि अरविंद केजरीवाल किस दिशा में चल रहे हैं और उनका असली मकसद क्या है। सारी पब्लिक यह बातें तो काफी पहले से जानती रही है। सुबह-सुबह पार्क में, ऑफिस में खाली वक़्त के दौरान या हर किसी फुरसत के क्षण में यही बातें चर्चा में रहती है। अंतर बस यह है कि अरविंद केजरीवाल के आरोप सार्वजानिक मंच से आते हैं। लेकिन आरोप लगाने भर से बात नही बनती। उन्हें इन चीजों के सबूत पेश कर देने चाहिए। ऐसा हो गया तो यही जनता उन्हें सर आंखो पर बिठाएगी। अगर सिर्फ ब्लैक मनी और भारत सरकार की बात करते रहे तो यह तो दशकों से सुनने में चला आ रहा है। ये सारी चीजें एक ही जगह आकर टिक जाती हैं कि हम अपना वोट देते समय आधार क्या बनाते हैं? तब तो हमें अपना धर्म, जाती और संप्रदाय करीब लगने लगता है।


(यह पत्र नवभारत टाइम्स में 12 नवंबर 2012 को प्रकाशित हुआ)