Wednesday, 18 May 2016

दुरुस्त कदम


सुप्रीम कोर्ट का 'किसी को भी वोट नहीं' पर फैसला नेताओं में लुप्त होती नैतिकता को दोबारा जीवनदान देने की पहल है। जब यह स्पष्ट होगा कि नेगेटिव वोटों की संख्या अधिक होने पर दुबारा चुनाव होंगे, तब पार्टियां दागी नेताओं से शर्तिया पल्ला झाड़ेंगी। देर से सही, लेकिन दुरुस्त कदम। अभी पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। राजनीतिक दलों को अभी से सतर्क होकर दागी नेताओं से तौबा करना चाहिए और साफ़ छवि के युवा नेताओं को मौका देना चाहिए।


(यह पत्र नवभारत टाइम्स में 1 अक्टूबर 2013 को प्रकाशित हुआ)