Thursday, 21 April 2016

सडकों पर किसान


संपादकीय टिप्पणी 'सड़कों पर उतरे किसान' सामायिक है। यह ठीक है कि विकास के लिए या फिर देश की सुरक्षा की दृष्टि से कई बार जमीन अधिकरण आवश्यक हो जाता है।
समस्या आज विकट इसलिए है कि सरकार उपजाऊ जमीन का अंधाधुंध अधिकरण करती जा रही है और विकास के नाम पर शुद्ध व्यवसाय शुरू कर दिया है।
उद्योग धंधो को बंजर जमीनें देनी चाहिए, इस नीति से कोई बेघर भी नही होगा और किसी की रोजी रोटी पर लात भी नही पड़ती। बेकार पड़ी जमीन के विकास पर आम जनता खुश होगी, कोई विरोध भी नही होगा। सरकार को सूझबूझ से कार्य करके सब के हितों की रक्षा करनी चाहिए।

(यह पत्र सरिता नवम्बर (द्वितीय) 2010 अंक में प्रकाशित हुआ)