Thursday, 21 April 2016

सांसदों की वेतन वृद्धि


संपादकीय टिप्पणी 'सांसदों की वेतन वृद्धि पर होहल्ला' सामायिक है। जनता की नाराजगी उचित है क्योंकि आज सांसद बनना कोई बच्चों का खेल नही है, करोडो अरबों में खेलने वाले ही सांसद हैं। इक्का दुक्का अपवाद को छोड़ दिया जाए तो आम आदमी सांसद नही बन सकता। कारण कई हैं, जिस के तहत गरीब संसद से दूर है
 सांसदों की पावर, अधिकार, मिलने वाली सुविधा और घपलों का मूल्यांकन किया जाए तो सांसदों का वेतन वृद्धि पर रोना एकदम गलत है। उन को मुफ़्त में समाज सेवा करनी चाहिए, केवल गरीब सांसदों को उचित वेतन मिलना चाहिए। गरीब सांसदों को पेंशन भी मिलनी चाहिए। वेतन और सुविधाएं सांसदों की आर्थिक स्थिति पर आधारित होनी चाहिए। कौन सांसद गरीब है, मालूम करना बेहद आसान है।
आज राजनीति एक पेशा है। अमीर पावर के लिए सांसद बनते हैं। उन को कोई सुविधा नही मिलनी चाहिए। पुश्त दर पुश्त राजनीति से जुड़े लोग अधिक हैं। पावर उन के पास होती है। अथाह संपति के मालिक यदि वेतन वृद्धि की वकालत करते है या फिर चुपचाप समर्थन करते हैं, तो उन की खोटी नीयत साफ़ झलकती है। यदि कोई वेतन के लिए अपने को गरीब घोषित करता है तब मीडिया का दायित्व है कि ऐसे सांसदों की नकाब जनता के सामने खोले और जनता खुद निर्णय करे।


(यह पत्र सरिता नवंबर (प्रथम( 2010) अंक में प्रकाशित हुआ)