Sunday, 24 April 2016

बेईमानी का सही सन्देश


नवम्बर (द्वितीय) 2010 अंक में संपादकीय टिप्पणी 'बेईमानी का सही सन्देश आदर्श सोसाइटी' में आपके विचार सटीक हैं। आज देश में हालात ये हैं कि कोई भी सरकारी काम बिना घोटालों के पूरा नही होता। मजे की बात यह है कि काम पूरा होने पर घोटाले उजागर होते हैं। यही आदर्श सोसाइटी घोटाले में भी हुआ है।
सोसाइटी बन कर तैयार है। अब पूरी इमारत को गिराने की कवायद भी उठ गई है। सरकार ने इसी में इतिश्री समझी कि चलो, मुख्यमंत्री को बदल दो। वैसे जनता कोई मूर्ख नही है कि वह संतुष्ट ही जाए क्योंकि बात सिर्फ आदर्श सोसाइटी की नही है। इसके समेत बाकी सभी घोटालों की है, जो उजागर तो होते हैं, लेकिन आज तक किसी को सजा नही मिली।
सभी जानते हैं, कोई किसी का कुछ नही बिगाड़ सकता क्योंकि आज तक सिर्फ लंबे क़ानूनी दांवपेंचों के चलते घोटाले अपने आप दफ़न हो जाते हैं। घोटाले रोकने के लिए एक जबरदस्त क्रांति की जरुरत है। वह क्रांति जो समाज की विचारधारा बदल सके वरना घोटाले थोक के भाव में आते जाते रहेंगे।


(यह पत्र सरिता जनवरी (प्रथम) 2011 अंक में प्रकाशित हुआ)