Wednesday, 13 April 2016

सरकार मस्त, जनता त्रस्त


सरिता (मार्च/द्वितीय) 2010 अंक में लेख 'बजट 2010 सरकार मस्त, जनता त्रस्त' में लेखक ने सही बातों का विश्लेषण किया है। देश में 2 वर्ग हैं, एक खास और दूसरा आम। वैसे देखा जाए तो लोगों को 2 वर्ग में बांटना इतिहास की परंपरा है। राजा महाराजाओं, बादशाहों के ज़माने से ही खास और आम व्यक्तियों में फर्क रखा जाता था।
उन के महल में भी दीवाने आम और दीवाने खास हुआ करते थे। उसी तर्ज पर हमारी सरकार भी लोगों को 2 वर्गों में बांट कर बजट केवल खास वर्ग को खुश करने के उद्देश्य से बनाती है। आम जनता महंगाई और कर्जो के बोझ तले पिसती है। उस का ख्याल किसी सरकार ने नही रखा है। हर रोज महंगाई से जूझता आम वर्ग किसी के आगे रो भी नही सकता, क्योंकि उस की सुध 5 साल बाद ही ली जाएगी। दिल्ली सरकार ने राष्ट्रमंडल खेलों के नाम पर वैट के रेट बढ़ा कर आम जनता पर बोझ डाल दिया। घर का बजट एक गृहणी कैसे बनाती है, हर वित्तमंत्री की समझना चाहिए।


(यह पत्र सरिता, मई (प्रथम) 2010 में प्रकाशित हुआ।)