Tuesday, 12 April 2016

भाषा की क्षमता


संपादकीय टिप्पणी 'कम होती भाषा की क्षमता' एकदम सही है। आज की शिक्षा प्रणाली भाषा की तरफ ठीक से ध्यान नही दे रही है। पूर्व में 3 घंटे की परीक्षा में प्रश्नों के उत्तर देने होते थे, जहां परीक्षार्थी के ज्ञान का भरपूर आकलन होता था। आज की शिक्षा व परीक्षा में ऑब्जेक्टिव टाइप प्रश्नों पर ध्यान दिया जा रहा है जहां 3 घंटे में अधिक से अधिक प्रश्नों को शामिल किया जाता है, जिस में परीक्षार्थी के ज्ञान के अलावा तुक्के का अधिक मिश्रण होता है।
भाषा के उचित ज्ञान के लिए पढ़ने के साथ लिखने की प्रवृत्ति का उचित विकास जरुरी है। मोबाइल और कंप्यूटर युग में कट, पेस्ट का अधिक से अधिक इस्तेमाल होने के कारण भाषा का ज्ञान आधा अधूरा ही रहता है, अधिक लिखने से भाषा का ज्ञान बढ़ता है, इसलिए शिक्षा प्रणाली में अधिक लिखने को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

(यह पत्र सरिता, मार्च (द्वितीय) 2010 में प्रकाशित हुआ।)