Sunday, 3 April 2016

नियंत्रण न हटाएं


किरीट पारेख की रिपोर्ट में दिया गया यह सुझाव देश की जनता को काफी भारी पड़ सकता है कि पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों को सरकार के नियंत्रण से बाहर कर दिया जाए। अगर सरकार ने इस सुझाव पर अमल किया तो पहले से ही मंहगाई से बुरी तरह त्रस्त जनता का तो जीना दूभर हो जाएगा। यह नियंत्रण हटने का सीधा अर्थ तेल-गैस के दामों में भारी इजाफा करना है। इससे अमीर तबके की सेहत पर तो कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन गरीब और मध्यवर्गीय जनता का बुरा हाल हो जाएगा। सरकार को ध्यान में रखना चाहिए कि देश में ज्यादा आबादी उस गरीब और मध्य वर्ग की है जिसे सोशल सिक्यूरिटी के नाम पर कुछ भी हासिल नही है। पेट्रोलियम उत्पादों से नियंत्रण हटाने की बजाए सरकार को इस तबके को कोई आर्थिक सामाजिक सुरक्षा देने का जतन करना चाहिए।


(यह पत्र नवभारत टाइम्स में 8 फरवरी 2010 को प्रकाशित हुआ।)