Sunday, 6 March 2016

बढ़ती ब्याज दरें


संपादकीय टिप्पणी 'बढ़ती ब्याज दरें' पढ़ी। आप का यह कहना उचित है कि मकान आदमी की ज़रूरत है, मार्किट रेट से उस मकान की कीमत चाहे करोड़ों में हो जाए लेकिन उस को बेच कर कहीं कोई नही जाता है। हां, मार्किट रेट के भरोसे बस, उस का मनोबल बढ़ जाता है कि वह करोड़पति बन गया है।
बढ़ती ब्याज दरों से मकान के रेट पर कोई फर्क नही पड़ता है। 2-3 प्रतिशत ब्याज दर ऊपर नीचे होने पर भी होम लोन पर असर नही पड़ता है क्योंकि जिसे मकान चाहिए वह किसी भी ब्याज दर पर मकान लेगा ही।
होम लोन पर असर ब्याज दरों की अपेक्षा मकान की कीमत का अधिक होता है। मंहगे मकानों के लिए अधिक लोन लेना पड़ेगा, जिस की क़िस्त अधिक होगी। यह एक मांग और पूर्ति का खेल है। आज मकान खरीदना जरुरत बन गई है। मांग बढ़ने से रेट भी बढ़ गए हैं। बढ़ती मांग से ब्याज दर भी बढ़ गई है। जब तक मकान की मांग कम नही होगी, ब्याज दर कम नही हो सकती।


(यह पत्र सरिता अक्टूबर (द्वितीय) 2007 अंक में प्रकाशित हुआ।)