Sunday, 21 February 2016

कांग्रेस की हार


संपादकीय टिप्पणी 'कांग्रेस की हार' सटीक लगी। आज सत्ता पाने के बाद हर पार्टी का नेता अपने में व्यस्त हो जाता है और आम जनता से उसकी दूरी बढ़ जाती है।
दिल्ली नगर निगम के चुनाव भी सीलिंग के चक्रव्यूह मैं फंस गए, नतीजा सामने है कि कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी। शहर को बेहतर बनाने और नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने के लिए जरुरी है कि बेलगाम शहरीकरण और व्यवसायीकरण पर अंकुश हो।
जिन नेताओं ने पहले मकानों के व्यवसायीकरण में हाथ बंटाया था अब मौके पर अदालत में चुप्पी साध गए। उन के अदालत और जनता के सामने बयान भी अलग अलग होते थे, जिस कारण कांग्रेस को जनता ने धाराशायी कर दिया।
अब प्रश्न यह उठता है कि क्या भारतीय जनता पार्टी दिल्ली में सीलिंग बंद करा सकेगी। इस में संदेह है क्योंकि अदालत के सामने वह साफतौर पर मना कर के अदालत की अवहेलना नहीं कर पाएगी। इस तरह जनता की तकलीफ ज्यों की त्यों बनी रहेगी, चाहे कोई भी पार्टी सत्ता में रहे।


(यह पत्र सरिता जून (द्वितीय) 2007 में प्रकाशित हुआ।)