Sunday, 7 February 2016

मीडिया हाइप


लेख 'मीडिया हाइप से खुशफहमी में फंसा देश' सितम्बर (प्रथम) पढ़ा। इस में लेखक ने जमीनी हकीकत से परिचय कराया है। हमें देश की स्थिति जानने के लिए गांवों या दूरदराज के इलाकों का भ्रमण करने की कोई आवश्यकता नहीं है। यदि हम राजधानी दिल्ली का सही रूप देख लें तो पूरे देश का हाल समझने में कोई देर नहीं होगी। राजधानी होने के बावजूद दिल्ली समस्याओं से घिरी हुई है। मॉल संस्कृति से आगे निकल कर मूल समस्याओं पर विचार करना चाहिए। बिजली, पानी, झुग्गी, कूड़ा और परिवहन की समस्या पर किसी का ध्यान नहीं जाता है।
एक तरफ हम 2010 में कामनवेल्थ गेम्स करा रहे हैं लेकिन बिजली ने दिल्ली निवासियों के छक्के छुड़ा दिए हैं। जहां बिजली का उत्पादन न के बराबर है और दूसरे राज्यों पर आश्रित है। पहली प्राथमिकता बिजली उत्पादन की होनी चाहिए, दूसरी समस्या परिवहन की है। मेट्रो रेल समस्या का समाधान है लेकिन यह दिल्ली के एक सीमित हिस्से में उपलब्ध है। पूरी दिल्ली और उपनगरों में इस का जाल फैलने में अभी काफी समय लगेगा। कुल मिला कर यदि राजधानी की समस्याओं को केंद्र और राज्य सरकार नहीं निबटा सकती तो गांवों और दूरदराज के इलाकों की समस्या तो ज्यों की त्यों रहेगी। मीडिया हाइप को बंद कर सच्चाई से रूबरू होना चाहिए।


(यह पत्र सरिता अक्टूबर (द्वितीय) 2006 अंक में प्रकाशित हुआ।)