Wednesday, 3 February 2016

बिना काम का वेतन


सरित प्रवाह के अंतर्गत टिप्पणी 'बिना काम के वेतन' पढ़ी। यह एकदम सही है कि बिना काम के वेतन क्यों दिया जाए। अपना विरोध प्रकट करना हम बुनियादी अधिकार मान सकते हैं लेकिन हड़ताल पर जा कर स्वास्थ्य सेवाएं ठप करके जनता को इलाज से वंचित करना एक अपराध है।
देश में आबादी के अनुपात में स्वास्थ्य सेवाएं न के बराबर हैं। यदि सरकारी अस्पताल बंद रहेंगें तो जनता कहां जाएगी। सरकार आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में असफल है इस का ताज़ा उदहारण है एम्स में डॉक्टरों की हड़ताल।
सरकार को चाहिए कि ऐसी स्थिति से निबटने के लिए कोई विकल्प जरूर रखे ताकि स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू रूप से चल सकें। वेतन के लिए नियम होने चाहिए कि जितना काम करो उतना वेतन पाओ। इस सिद्धान्त को कड़ाई से लागू करना चाहिए ताकि भविष्य में हड़ताल पर जाने से पहले हर सरकारी कर्मचारी सोचे।


(यह पत्र सरिता सितम्बर (द्वितीय) 2006 अंक में प्रकाशित हुआ।)