Sunday, 28 February 2016

गांवो में डॉक्टर


स्वास्थ्य मंत्रालय का मेडिकल छात्रों को एक साल के लिए गांवों में सेवा का प्रस्ताव जल्दबाजी में लिया गया लगता है। यह सच है कि आर्थिक विकास का चक्का सिर्फ शहरी क्षेत्रों में तेजी से घूम रहा है। दूरदराज और गांवों में विकास नाममात्र को भी नहीं पहुंचा है। वहां स्वास्थ्य सेवाएं भी नाम की हैं। जब तक सरकार गांवों में अस्पताल और मेडिकल सेवाओं का मूल ढांचा सही नही करती तब तक मेडिकल छात्रों को एक वर्ष गांव में अपनी सेवाएं देने के लिए भेजना सही नही कहा जाएगा। ऐसा गांववास उनके लिए कठिन ही होगा। आखिर छात्र वहां जाकर क्या करेंगे, जहां न तो अस्पताल है, न दवाईयां और न ही इलाज के उपकरण? बिना मूल सुविधाओं के मेडिकल छात्र न तो किसी का इलाज कर पाएंगे और न ही समाज की सेवा कर सकेंगे। उलटे अपनी पढाई भी गांव में एक साल बिताने में भूल जाएंगे। बेशक, गांवों में डॉक्टरों की बेहद जरुरत है, इसलिए बेहतर होगा कि सरकार मेडिकल छात्रों पर कोई बाध्यकारी नियम लागू करने से पहले ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक अस्पताल बनाए, जहां इलाज की सभी सुविधाएं हों।


(यह पत्र नवभारत टाइम्स में 16 जुलाई 2007 को प्रकाशित हुआ।)