Thursday, 25 February 2016

मंहगाई दर


सरकार होलसेल प्राइस इंडेक्स के ताज़ा आंकड़ों पर ख़ुशी जाहिर कर रही है कि मंहगाई दर चार फीसदी तक नीचे आ गई है, लेकिन सरकार और आम जनता की ख़ुशी में काफी अंतर है। जब तक आम जनता का रसोई का बजट सही नही होगा, तब तक लोगों के चेहरे पर ख़ुशी नही आ सकती। आम जनता की होलसेल प्राइस इंडेक्स से कोई सरोकार नही है। उसे रिटेल प्राइस पर सामान खरीदना पड़ता है, जिसमें कोई गिरावट नही है। दूध के रेट मिलावट के साथ बढ़ते जा रहे हैं। यही हाल दालों और अनाजों का है। इसलिए सरकार को चाहिए कि रिटेल प्राइस इंडेक्स की शुरुआत करे, ताकि उसे भी जमीनी हकीकत का पता चल सके। होलसेल और रिटेल प्राइस में बहुत अंतर है, जिसे कम करना सरकार का पहला कर्तव्य होना चाहिए।

(यह पत्र नवभारत टाइम्स में 9 जुलाई 2007 को प्रकाशित हुआ।)