Sunday, 14 February 2016

प्राथमिक शिक्षा


संपादकीय टिप्पणी 'प्राथमिक शिक्षा प्रगति में स्पीड ब्रेकर' पढ़ी। यह एकदम सही है कि सरकार शिक्षा पर समुचित ध्यान नहीं दे रही है और अपना वोट बैंक बढ़ाने के लिए उच्च शिक्षा में आरक्षण कर समाज को बांटने में लगी है। आज समय उच्च शिक्षा में आरक्षण का नहीं, बल्कि प्राथमिक शिक्षा के ढांचे को मजबूत करने का है ताकि समाज के हर वर्ग का बच्चा शिक्षा पा सके।
अमीरों के लिए प्राइवेट स्कूलों की कोई कमी नहीं है लेकिन गरीब और मध्यवर्गीय समुदाय के लिए सरकारी स्कूलों में पढाई का स्तर बहुत खराब है। अध्यापकों की योग्यता बढ़ाने के लिए ट्रेनिंग स्कूल होने चाहिये और नई प्रयोगशालाएं बनानी चाहिए। सरकारी स्कूलों में यदि अध्यापक पढाई का अच्छा माहौल बनाएंगे तो अधिक बच्चे के लिए प्रोत्साहित होंगे।
अभी तक तो मेधावी छात्र अपने बलबूते पर बिना किसी प्रोत्साहन के आगे बढ़ने के लिए जूझते हैं लेकिन ऐसे छात्रों का अनुपात बहुत ही कम है। हमें प्राथमिक शिक्षा को मजबूत करना पड़ेगा ताकि बच्चों की नींव मजबूत हो। मजबूत नींव के आधार पर उच्च शिक्षा के लिए समाज का हर वर्ग बिना किसी आरक्षण के तैयार रहेगा।


(यह पत्र सरिता, दिसंबर (प्रथम) 2006 को प्रकाशित हुआ।)