Sunday, 27 December 2015

पटरी दुकानदार


संपादकीय टिप्पणी 'सुप्रीम कोर्ट का एक ठोस फैसला' पढ़ी। यह सच है कि पटरी पर दुकानदारी से कई समस्याओं का जन्म होता है। उन सबसे छुटकारा पाने के लिए पटरियां साफ़ करना बेहद जरुरी है। दिल्ली के किसी भी बाजार को देखें, समस्या एक जैसी है कि दुकानदार पटरी पर अपना सामान रखते हैं और पटरी वाले सड़क पर बैठते हैं। इस से सबसे अधिक दिक्कत पैदल चलने वालों की होती है कि कैसे वाहनों और सामान के बीच से निकलें।
दिल्ली की इसी से मिलतीजुलती एक और समस्या साप्ताहिक बाज़ारों की है जो दिल्ली की हर छोटी बड़ी कॉलोनी में लगते हैं और सप्ताह के दिनों के नाम से जाने जाते हैं। इन से जनता को फायदा है तो नुकसान भी है।
इन साप्ताहिक बाज़ारों के लगने और उठने के समय होने वाले शोरशराबे से कॉलोनी के लोगों की रातें तो ख़राब होती ही हैं, कूड़े करकट का अम्बार भी लग जाता है। सरकार को इस दिशा में भी कदम उठाने चाहिए।


(यह पत्र सरिता मई (द्वितीय) 2006 अंक में प्रकाशित हुआ।)