Sunday, 27 December 2015

आरक्षण का सवाल


आजादी के बाद समाज के दबे कुचले तबके को राष्ट्र की मुख्यधारा में जोड़ने के लिए आरक्षण की निति अपनाई गई, लेकिन पिछले 6 दशकों में इसे वोट बैंक का जरिया बना दिया गया है। यही कारण है कि समय समय पर आरक्षण में वृद्धि कर दी जाती है और उसके पक्ष या विरोध में माहौल बनाया जाता है। सरकार को सामाजिक पिछड़ेपन के मूल कारणों पर ध्यान देना चाहिए। आज प्राइमरी शिक्षा बहुत ख़राब स्थिति में है। स्कूलों में पढ़ाई के समुचित साधन नहीं हैं। कहीं शिक्षक नहीं हैं, कहीं पुस्तकें नहीं हैं और कहीं साइंस लैब नहीं है। असंख्य बच्चे शिक्षा पूरी करने से पहले ही स्कूल छोड़ जाते हैं। सरकार को प्राथमिक शिक्षा की स्थिति बेहतर बनानी पड़ेगी, ताकि बच्चों की नींव मजबूत हो और वे उच्च शिक्षा के लायक बनें। यह भी जरुरी है कि गरीब बच्चों की मुफ़्त शिक्षा मिले। नींव मजबूत होगी तो आरक्षण का सवाल ही गौण हो जाएगा।


(यह पत्र नवभारत टाइम्स में 11 मई 2006 को प्रकाशित हुआ।)