Sunday, 27 December 2015

अनाज के भाव


आज अनाजों के रेट आसमान छू रहे हैं, जिसका मुख्य कारण वायदा कारोबार को मान्यता देना है। हालात यह है कि अनाज और दलों के दाम बढे हुए हैं, लेकिन उसका असली लाभ बिचौलियों और व्यापारियों की जेब में जा रहा है। किसानों को अपनी पैदावार का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। आज हालात यह हो गई है कि उत्पादन भरपूर है, लेकिन बाजार में तेजी है। जिंसों में तेजी बड़े व्यापारियों का खेल है जो अनाज मंडी को सट्टा बाजार में परिवर्तित कर रहे हैं। इसलिए सरकार को किसानों को मिलने वाले रेट और थोक तथा खुदरा मूल्यों के अंतर के लिए उचित फार्मूला बनाना चाहिए, ताकि जनता के पेट पर लात न पड़े।


(यह पत्र नवभारत टाइम्स में 3 मई 2006 को प्रकाशित हुआ)