Sunday, 27 December 2015

राजधानी में पानी


शहरों के विकास के साथ ही पानी की सप्लाई भी कम होती जा रही है। जल के संचयन और वितरण पर सरकार अधिक ध्यान नहीं दे पा रही है। एक तरफ दिल्ली में बहुमुखी विकास की बातें हो रही हैं, तेजी से फ्लाईओवर और मॉल बनाए जा रहे हैं, बहुमंजिला इमारतों पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन पानी की व्यवस्था लचर हो रही है। पानी पर राजनीति खेली जा रही है। विभिन्न राज्य आपस में लड़ रहे हैं। कभी तमिलनाडु और कर्नाटक उलझ जाते हैं तो कभी दिल्ली और उत्तर प्रदेश। सरकार को चाहिए कि नगर के विकास के साथ साथ पानी के वितरण का समुचित प्रबन्ध करे, ताकि जीवन की बुनियादी जरुरत सबको मिल सके।


(यह पत्र नवभारत टाइम्स में 5 मई 2006 को प्रकाशित हुआ।)