Sunday, 15 November 2015

निजी जीवन में


संपादकीय टिप्पणी 'निजी जीवन में अनावश्यक ताकझांक' पढ़ी। यह सही है कि किसी को भी दूसरों के निजी जीवन में ताकझांक की इज़ाज़त नहीं होनी चाहिए, लेकिन यह भी सच है कि हम अपने नेताओं और अभिनेताओं का अनुसरण करते हैं और उन से जुडी तमाम बातों को जानना चाहते हैं क्योंकि वे युवाओं के रोल मॉडल हैं।

सार्वजानिक जीवन के कुछ फायदे हैं तो कुछ नुकसान भी। यदि हम अपनी मर्यादा के अंदर रहें तो उस का फायदा अधिक होगा। सार्वजानिक व्यक्ति यदि मर्यादा को तोड़ते हैं तो उन का नुकसान तो होगा ही। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल किलिंटन इस के जीते जागते सुबूत हैं।

ताकझांक एकदम गलत है लेकिन यदि कोई सार्वजानिक व्यक्ति कुछ अगल हट कर करता है तब उस का खुलासा भी ज़रूरी है, क्योंकि उसका असर समाज से जुड़े हर व्यक्ति पर पड़ता है। इसीलिए सेलिब्रिटी को भी संयम अधिक रखना पड़ेगा ताकि उस का गलत अनुसरण न हो।


(यह पत्र सरिता, मार्च (दिव्तीय) 2006 अंक में प्रकाशित हुआ।)