Sunday, 4 October 2015

तेल की धार


यह भी कैसा विरोधाभास है कि वाहन खरीदना तो आसान हो गया है लेकिन उसे चलाना मुश्किल क्योंकि पेट्रोल की कीमतों में लगातार इज़ाफ़ा होता जा रहा है। हम तेल की कीमतों को अपने काबू में नहीं रख सकते क्योंकि यह इंटरनेशनल मार्किट पर निर्भर करता है। हमें ऊर्जा के दूसरे स्त्रोतों को विकसित करना चाहिए ताकि तेल पर निर्भरता कम हो। तेल की कीमत से सिर्फ यातायात ही महंगा नहीं होता, बल्कि इससे रोज़मर्रा की हर वास्तु महंगी होती है।

(यह पत्र नवभारत टाइम्स में 11 फरवरी 2006 को प्रकाशित हुआ)