Sunday, 2 August 2015

अवैध निर्माण


एमसीडी ने अवैध निर्माण तोड़ने का काम जोरशोर से शुरू किया तहस लेकिन अब वह सिर्फ खानापूरी कर रही है। हाई कोर्ट के निर्देश के बावजूद एमसीडी के कानों पर जूं नहीं रेंग रही। एक तरफ हाई कोर्ट का दिशानिर्देश तारीफ के काबिल है लेकिन एमसीडी की गाज सिर्फ आम आदमी पर गिर रही है।

(यह पत्र नवभारत टाइम्स में 23 जनवरी 2006 को प्रकाशित हुआ।)