Sunday, 12 July 2015

खुलें अदालतें


रोहिणी में कोर्ट ट्रान्सफर करने का वकीलों द्वारा विरोध किया जाना सही नहीं है। वकील एक दिन में तीस हज़ारी और रोहिणी दोनों जगह की अदालतों में हाज़िर नहीं हो सकते इसलिए वे विरोध कर रहे हैं। रोहिणी की तर्ज़ पर अन्य जिलों में भी अदालतें खोली जानी चाहिए ताकि जनता को न्याय के लिए दूर न जाना पड़े। नई अदालतें खुलने से वकीलों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगें।


(यह पत्र नवभारत टाइम्स में 9 जनवरी 2006 को प्रकाशित हुआ।)