Monday, 27 July 2015

रिजर्वेशन की राजनीति

आंध्र प्रदेश में मुसलमानों को आरक्षण देने का मुद्दा वोट बैंक की राजनीति से प्रेरित लगता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सरकार की खिंचाई की है। वास्तव में देखा जाए तो हमारे नेता सिर्फ वोट बैंक पर ही नज़र रखते हैं, इसलिए समस्या की जड़ को नहीं देख पाते। समाज के दबे कुचले वर्ग को ऊपर आने का अधिकार है। इसके लिए जरुरी है उचित शिक्षा, जो दुर्भाग्य से हर वर्ग को नहीं मिल पाती है। शैक्षिक योग्यता न होने पर आरक्षण का फायदा नहीं मिल पाता है, क्योंकि सरकारी नौकरी पाने के लिए एक न्यूनतम शिक्षा की आवश्यकता है। आरक्षण दरअसल कॉस्मेटिक सर्जरी ही है, जिसका अधिकांश लोग फायदा नहीं उठा पाते हैं। जब सरकारी नौकरियां कम हो रही हैं, तब सरकार को शिक्षा के प्रसार और स्वरोजगार उपलब्ध कराने पर समुचित ध्यान देना चाहिए। आरक्षण किसी समस्या का हल नहीं है।


(यह पत्र नवभारत टाइम्स में 16 जनवरी 2006 को प्रकाशित हुआ।)