Wednesday, 15 July 2015

डॉक्टरों की बदहाली


हमारे देश में डॉक्टरों की ज़बरदस्त कमी है, जिसके कारण अनेक नागरिकों को समुचित चिकित्सा नहीं मिल पाती है। कस्बों, गांवों और दूरदराज के इलाकों में मरीजों का समुचित इलाज़ नहीं हो पाता है। करदाताओ की खून पसीने की कमाई पर मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद तमाम डॉक्टर मोटी पगार के लालच में विदेश चले जाते हैं। हालांकि यह एक बड़ी विडम्बना है कि विदेश गए अनेक भारतीय डॉक्टरों को विदेशों के कड़े नियमों के तहत न तो नौकरी मिलती है और न ही वे वहां प्राइवेट प्रैक्टिस ही कर पाते हैं। सच तो यह है कि भारतीय डॉक्टर विदेशों में तंगहाल हैं और मंदिरों - गुरुद्वारों के लंगर पर गुजरा कर रहे हैं। ब्रिटेन में डॉक्टरों की बदहाली यह सीख देती है कि हर वह चीज़ जो चमकती है, सोना नहीं होती है। इधर भारत में कई नीम हकीम और कम्पाउण्डर डॉक्टरों की कमी के चलते मरीजों का आधा अधूरा इलाज़ करके अच्छी कमाई कर रहे हैं। भारतीय डॉक्टरों को इन घटनाओं से सबक लेना चाहिए कि विदेश पलायन से बेहतर भारतीय ज़िन्दगी है। सरकार को भी देश हित में डॉक्टरों के ब्रिटेन आदि देशों में जाने पर पाबन्दी लगा देनी चाहिए।


(यह पत्र नवभारत टाइम्स में 11 जनवरी 2006 को प्रकाशित हुआ।)