Sunday, 7 June 2015

महिला आरक्षण सुझाब

संपादकीय टिप्पणी के अंतगर्त 'महिला आरक्षण सुझाव' पर आप के विचार एकदम सही हैं कि आरक्षण का बवाल केवल एक राजनीतिक एजेंडा है और किसी भी दल को महिलाओं की संसद में भागीदारी से कोई मतलब नहीं है। अपने को महिलाओं का हितैषी बताने वाले सारे दल एक ही थैली के चट्टे बट्टे हैं, तभी तो पिछले 10 सालों से संसद में लटका महिला आरक्षण बिल किसी न किसी वजह से पास नहीं हो रहा है।
अगर राजनीतिक दल सचमुच में महिलाओं की भागीदारी संसद में चाहते हैं तो बिना आरक्षण के भी चुनावों में महिलाओं को अधिक मात्रा में टिकट दे सकते हैं, लेकिन इस तरह की मंशा किसी की भी नहीं है।
देखा जाए तो आज तक आरक्षण ने किसी का भी भला नहीं किया है। यह तो केवल वोट बटोरने का एक तरीका है। अफ़सोस इस बात का है कि एक महिला के नेतृत्व में चलने वाली यूपीए सरकार के घटक दल ही आरक्षण का विरोध कर रहे हैं।


(यह पत्र सरिता नवम्बर (प्रथम) 2005 अंक में प्रकाशित हुआ।)