Thursday, 28 May 2015

नज़रिया बदलें


3 अक्टूबर को प्रकाशित अपने लेख 'डेढ़ हज़ार बरस लंबी नींद' में फ़िरोज़ बख्त अहमद ने ठीक ही कहा है कि चूंकि अब हमें इक्कीसवीं सदी में रहना है इसलिए पुरानी मान्यताएं छोड़नी होंगी। सानिया मिर्ज़ा के खिलाफ फ़तवा केवल राजनीति से प्रेरित लगता है। सानिया मिर्ज़ा जिस ड्रेस में खेलती हैं वह टेनिस की मांग है। ड्रेस हमेशा आयु, प्रदेश की जलवायु, व्यवसाय और आमदनी की हैसियत से निर्धारित होती रही है। अहमदाबद की एक संस्था में मुस्लिम महिलाएं फैशन डिजाइनिंग का कोर्स करते हुए बिकनी तक डिज़ाइन कर रही हैं क्योंकि यह समय और पेशे की मांग है। यह उनके जीवन निर्वाह और उनकी आत्मनिर्भरता के लिए अति आवश्यक है। इसलिए हमें समय के अनुसार अपनी सोच में परिवर्तन करना ही पड़ेगा।


(यह पत्र नवभारत टाइम्स में 13 अक्टूबर 2005 में प्रकाशित हुआ।)