Sunday, 24 May 2015

महिला आरक्षण


पिछले 10 वर्षो से महिला आरक्षण बिल राजनीतिक दलों का समर्थन पाने में असमर्थ रहा है, फिर बार बार किन कारणों से इस पर बहस होती है, यह समझ से परे है। एक तरफ सभी पार्टियां महिलाओं के समान अधिकार की बात करती हैं, लेकिन संसद और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के सवाल पर ना नुकुर करती हैं। जब महिलाओं का जनसंख्या में अनुपात 46 से 48 प्रतिशत अर्थात आधा है, तो उन्हें 50 प्रतिशत आरक्षण मिलना चाहिए। कई बार तो लगता है कि महिला आरक्षण बिल सिर्फ एक दिखावा और छलावा है। यदि राजनीतिक दल वाकई महिलाओं को राजनीति में लाना चाहते हैं, तो वे बिना आरक्षण के भी चुनावों में उन्हें  अधिकाधिक टिकट देकर ऐसा कर सकते हैं। असल सवाल है नीयत का। अगर नेताओं की नीयत साफ़ होती तो यह मसला कब का सुलझा लिया गया होता।


(यह पत्र नवभारत टाइम्स में 2 सितम्बर 2005 को प्रकाशित हुआ।)