Sunday, 24 May 2015

टकराव से बचें


सुप्रीम कोर्ट की सरकार के प्रति नाराज़गी वाजिब नज़र आती है, क्योंकि साझा सरकार के विभिन्न दलों की विचारधारा में कोई समानता नहीं है, वे अपने व्यक्तिगत स्वार्थ में लीन नज़र आते हैं। उनके बीच राष्ट्रीय मुद्दों पर आम सहमति नहीं है, इसीलिए सरकार कोई महत्वपूर्ण और सशक्त कानून बनाने में असमर्थ है। महिला आरक्षण बिल को ही लीजिये, सरकार चाह कर भी इसे पास कराने में असमर्थ है। यूपीए सरकार के ही दो घटक बिहार में सरकार बनाने के प्रश्न पर लड़ रहे हैं। सरकार यदि अपने गिरेबान में झांके और अवलोकन करे तो सुप्रीम कोर्ट की नाराज़गी सही नज़र आएगी। निजी संस्थानों में आरक्षण के सवाल पर कोर्ट के रुख पर जो बयानबाजी की गई वह दुर्भाग्यपूर्ण है। यूपीए सरकार के विभिन्न घटक पहले आम सहमति बनाएं और न्यायपालिका से अनावश्यक टकराव से बाज़ आएं।


(यह पत्र नवभारत टाइम्स में 1 सितम्बर 2005 को प्रकाशित हुआ।)