Sunday, 17 May 2015

मायावती का ब्राह्मण मोह


संपादकीय टिप्पणी "मायावती का ब्राह्मण मोह" पढ़ी। यह सच है कि देश की राजनीति में आगे जाने के लिए सिर्फ दलित वोट ही काफी नहीं हैं क्योंकि भारत में विभिन्न धर्म और जातियां हैं। किसी एक वर्ग के माध्यम से राजनीति में प्रवेश तो किया जा सकता है लेकिन राष्ट्र की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए सभी धर्मों और समुदायों का प्रतिनिधित्व ज़रूरी है, इसीलिए कभी ब्राह्मणों को जूते मारने की बात करने वाली मायावती अब उन्ही से गले मिलने को तैयार है।
राजनीति का दूसरा नाम स्वार्थ है। इसके लिए अपने सिद्धान्तों को त्याग कर कुछ करना अनुचित कभी नहीं रहा है। दलित वर्ग तो पूरे देश में हैं और हर राज्य में इसके अलग अलग नेता हैं। मायावती सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित रह गई हैं। उनका वोट बैंक दूसरे दलों में जाने लगा है तो दूसरे दलों के वोट बैंक पर सेंध लगाने के लिए उन का यह प्रयास सिर्फ स्वार्थ की राजनीति है।

(यह पत्र सरिता अगस्त (द्वितीय) 2005 में प्रकाशित हुआ।)