Thursday, 9 April 2015

बिजली की दरें

राजधानी की बिजली की बढ़ती दरों का झटका मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को भी झेलना पड़ा जब उनकी ही पार्टी के विधायकों ने इस मुद्दे पर उनकी आलोचना की। लोगों में बिजली की बढ़ती दरों को लेकर काफी आक्रोश है। निजी कंपनियों की बिजली खरीद और बिक्री दरों में काफी अंतर है। अब और अधिक बढ़ोतरी का कोई औचित्य नहीं है।


(यह पत्र नवभारत टाइम्स में 5 मई 2005 को प्रकाशित हुआ।)