Wednesday, 8 April 2015

अपहरण उद्योग बनाम राजनीतिक संरक्षण

ले 'राजनीती में उलझा बच्चों का अपहरण' (मार्च/प्रथम) के अन्तर्गत लेखक ने बिलकुल सही कहा है कि बच्चे किसी का वोट बैंक नहीं तभी तो लालू प्रसाद यादव ने उन से मिलना उचित नहीं समझा और हेलीकाप्टर में बैठे बैठे ही उन्हें देखते रहे। आज बच्चे वापस आ गए हैं लेकिन मूल प्रश्न का उत्तर नहीं मिला की इन अपहरणों के पीछे किस का हाथ है।
बिहार में अपहरण के बढ़ते हुए ग्राफ को देख कर तो यही कहना होगा कि आज यह घिनौना कार्य राजनीति से जुड़ चुका है। बिहार में चुनाव समाप्त हो जाने के बाद राष्ट्रपति शासन लागू हो गया और अपहरण का दौर थम गया। क्या यह संकेत काफ़ी नहीं है कि अपहरण उद्योग को राजनेताओँ का संरक्षण प्राप्त है।
बिहार के चुनाव नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि बिना राजनीतिक संरक्षण के अपहरण उद्योग को चलाना मुश्किल है।


(यह पत्र सरिता अप्रैल (द्वतीय)2005 अंक में प्रकाशित हुआ।