Tuesday, 7 April 2015

कहां जाएं लोग


पिछले दिनों दिल्ली प्रदेश कांग्रेस में असंतोष खुलकर सामने आ गया। पर यह भी सच है कि शीला दीक्षित के खिलाफ कांग्रेस नेताओं की बगावत के पीछे नेताओं का अपना स्वार्थ ज्यादा है। उन्हें जनता की समस्याओं से कुछ लेना देना नहीं है। क्या सत्ता परिवर्तन बिजली और पानी की बढ़ती दरों, लॉ एंड आर्डर, परिवहन, सफाई, पार्किंग जैसी समस्याओं का कोई हल निकाल पाएगा? लगता है यही भांपकर आलाकमान ने नेतृत्व परिवर्तन का निर्णय नहीं किया। असंतुष्ट नेता तो सोनिया गांधी के पास चले गए, लेकिन बढ़ती महंगाई के बोझ तले जनता किस नेता के पास जाकर अपनी समस्याओं का समाधान पाए? जनता की सहानभूति के लिए नेताओं को चाहिए कि वे सार्वजानिक मंच पर घोषणा करें कि बिजली, पानी की दरों में कटौती होगी या नहीं और परिवहन सेवा कैसे सुधरेगी?


(यह पत्र नवभारत टाइम्स में 30 अप्रैल 2005 में प्रकाशित हुआ)