Thursday, 23 April 2015

ब्लैक मनी की जड़


25 जून को प्रकाशित अपने लेख में सीबीआई के पूर्व निदेशक जोगिन्दर सिंह ने ब्लैक मनी को ख़त्म करने के उपाय तो बताए हैं, लेकिन वे इस समस्या की जड़ तक नहीं पहुंचे कि आखिर ब्लैक मनी पैदा क्यों होती है। आज तक किसी भी वित्तमंत्री ने ब्लैक मनी की जड़ तक पहुंचने की कोई कोशिश नहीं की। इसकी जड़ हैं करों की भरमार। केंद्र, राज्य और निगम स्तरों पर लगाए जाने वाले विभिन्न करों की लिस्ट बनाई जाए तो हम अपने दांतों तले उंगली दबा लेंगे। कोई अर्थशास्त्री इस बात को बताने में असमर्थ है कि किस सीमा तक कर लगाने चाहिए कि करदाता करों की चोरी न करें। आयकर, बिक्री कर (वैट) कस्टम, एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स प्रमुख रूप से ब्लैक मनी के लिए जिम्मेवार हैं। हर वर्ष करों में संशोधन किया जाता है, लेकिन कर प्रक्रिया आज भी जटिल बनी हुई है। सरकार को चाहिए कि वह अपने खर्चो में कटौती करे, ताकि कम करों में बजट पूरा हो जाए और ब्लैक मनी जड़ से समाप्त हो।


(यह पत्र नवभारत टाइम्स में 1 जुलाई 2005 को प्रकाशित हुआ।)