Wednesday, 22 April 2015

कटघरे में न्यायपालिका


एक समय था जब लोग न्यायपालिका पर किसी तरह की टीका टिप्पणी से परहेज करते थे। लेकिन अब स्थितियां ऐसी बन गई हैं कि जजों की क्षमता पर भी सवाल उठाए जाने लगे हैं। इसके लिए कहीं न कहीं न्यायपालिका ही जिम्मेवार है। कुछ जजों के आचरण के कारण अब न्यायपालिका निर्विवाद पवित्र क्षेत्र नहीं रही। आप किसी भी अदालत में चले जाएं। वहां लोग यह कहते पाए जाते हैं कि अमुक जज मज़दूरों, किरायेदारों, मकान मालिकों अथवा सरकार के पक्ष में निर्णय देते हैं, आपका केस इस बात पर अधिक निर्भर करता है कि कौन जज सुनवाई कर रहा है।


(यह पत्र नवभारत टाइम्स में 30 जून 2005 को प्रकाशित हुआ।)