Monday, 20 April 2015

दोहरा मापदंड


फिल्मों और टीवी में ध्रूमपान के दृश्यों पर रोक लगाने का सरकार का फैसला सराहनीय है। युवा और बच्चे फिल्मों और टीवी धारावाहिकों का अनुसरण करते हैं। इनमें नायक को धूम्रपान करते देख उनमें तंबाकू का सेवन करने के प्रति एक आकर्षण जागता है, क्योंकि वे हर मामले में नायक की तरह बनना चाहते हैं। फिर भी सरकार का यह निर्णय उसकी दोहरी मानसिकता को ही दर्शाता है। सिगरेट, तंबाकू के साथ शराब भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। जहरीली शराब के कारण अनगिनत मौतें हो चुकी हैं और कई परिवार तबाह हो चुके हैं। चूंकि शराब का वितरण लगभग सरकार के हाथ में है और वह अपने पेट पर लात नहीं मारना चाहती, इसलिए मद्पान के दृश्यों पर वह चुप है। हर खलनायक के हाथ में शराब का जाम होता है और हर नायक दुखद परिस्थितियों में शराब में डूबा दिखाया जाता है। इसलिए सरकार को दोहरा मापदंड छोड़ कर सिगरेट और शराब पर एक जैसी नीति अपनानी चाहिए।


(यह पत्र नवभारत टाइम्स में 11 जून 2005 को प्रकाशित हुआ।)