Monday, 27 April 2015

धर्म का मार्ग


यह सही है कि कोई भी धर्म बैर नहीं सिखाता, लेकिन हम इस तथ्य को झुठला नहीं सकते कि दुनिया में धर्म के कारण काफी रक्तपात हुआ है और आज भी हो रहा है। आज आतंकवाद ने धर्म को ही अपना हथियार बनाया है। भारत और पाकिस्तान का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ। आज भी देश के नेता धर्म के आधार पर वोट मांगते हैं। इक्कीसवीं सदी के हाई टेक युग में जी रहे हम आज भी धर्म के नाम पर बंटे हैं। धर्म वास्तव में आस्था से जुड़ा मसला है। धर्म तब भटकता है जब हम स्वार्थी हो जाते हैं और अपना निजी हित साधने के लिए धर्म की मनमानी व्याख्या करते हैं और उसके प्रचार में लग जाते हैं।


(यह पत्र नवभारत टाइम्स में 20 जुलाई 2005 को प्रकाशित हुआ।)