Monday, 13 April 2015

एक साल का सफ़र

इस एक साल में यूपीए सरकार की सबसे बड़ी उपलब्दि सफलतापूर्वक सरकार चलाने की है। उसने विभिन्न दलों को खुश रखकर विपक्ष की चालों को मात दी है, लेकिन जनसाधारण के लिए न तो खास नीतियां लागू हुई हैं और न ही रोज़मर्रा की परेशानियों से कुछ राहत है। जनता बढ़ती महंगाई, बिजली, पानी और परिवहन समस्या से जूझ कर रह जाती है। सरकार की नीतियां अमेरिका, वर्ल्ड बैंक, आईएमएफ को खुश करने के लिए बनती जा रही हैं। सरकारी विभागों में फैला भ्रष्टाचार इस बात का प्रमाण है कि सरकार का या तो उन पर कोई नियंत्रण नहीं है या फिर भ्रष्टाचार को सरकारी सरंक्षण हासिल है। देश की अधिकांश आबादी गांवों में है, लेकिन वहां विकास न के बराबर है। रोज़गार के अवसर ग्रामीण क्षेत्रों में कम हैं, इसीलिए शहरों की तरफ पलायन जारी है और महानगर स्लम बनते जा रहे हैं।


(यह पत्र नवभारत टाइम्स में 21 मई 2005 को प्रकाशित हुआ।)