Monday, 16 March 2015

बदले खेती का रूप


आज कृषि के स्वरुप में व्यापक बदलाव की जरूरत है। कृषि छेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए सिंचाई की सुविधा बेहतर बनानी होगी। साथ में कृषि को आधुनिक करने के लिए भूमि सुधारों की आवश्यकता है। भूमि के छोटे छोटे टुकडों पर कम साधनों के साथ कृषि में विकास असंभव है। कृषि को कॉर्पोरेट कल्चर की तरह विकसित करना होगा, ताकि बैंक वित्तीय सहायता देने में हिचके नहीं और अति आधुनिक तरीकों से कृषि को बढ़ावा मिले। अगर कृषि का भरपूर विकास हुआ तो दस फीसदी विकास दर भी हासिल की जा सकती है। कृषि को कॉर्पोरेट रूप देने से गांवो में आधुनिक सुविधाएं पहुंचेंगी तो महानगरों की तरफ पलायन पर भी रोक लग सकेगी।


(यह पत्र नवभारत टाइम्स में 14 अप्रैल 2005 को प्रकाशित हुआ।)