Friday, 6 February 2015

बिजली बिल का झटका


एक बार फिर दिल्ली में बिजली दरों में बढ़ोतरी की चर्चा जोरों पर है। निजी कंपनियो ने इसमें 60 फीसदी वृद्धि का प्रस्ताव रखा है। लगता है दिल्ली सरकार और बिजली वितरण कंपनियो के बीच कोई समझोता है जिसके तहत हर वर्ष बिजली दरों को बढ़ाया जा रहा है। एक तरफ महाराष्ट्र में बिजली दरों में कमी आई है, जबकि दिल्ली में बिजली बिल बढ़ता ही जा रहा है। बिजली वितरण का निजीकरण किये जाने के पीछे बिजली की चोरी रोकना भी एक मकसद था। पर यह आज भी जारी है। निजी कंपनियां इसे रोक पाने में पूरी तरह विफल रही हैं। इसका एक बड़ा कारण है बिजली चोरों को मिल रहा राजनीतिक संरक्षण। वोट बैंक को कैश करने के कारण बिजली चोरी जारी है। दिल्ली सरकार को चाहिए कि वह सभी आंकड़ों को सार्वजनिक करे, ताकि जनता जान सके कि बिजली चोरी कम क्यों नहीं हो रही है। इसका दंड उपभोक्ताओं को नहीं बल्कि दिल्ली सरकार और निजी कंपनियो को सहना चाहिए। जो बिजली का बिल भरते हैं, उन पर अधिक भार डालना अनुचित है।


(यह पत्र नवभारत टाइम्स में 24 मार्च 2005 को प्रकाशित हुआ।)