Friday, 6 February 2015

भ्रष्टाचार नहीं, शिष्टाचार


भ्रष्टाचार अब शिष्टाचार बन गया है। इसके कई कारण हैं, लेकिन एक बड़ी वजह है सरकारी नियमों की जटिलता और उनकी विसंगतियां। मसलन एक तरफ तो सरकार सेल्स टैक्स में सुधार के लिए वैट लागू कर रही है, लेकिन व्यापारियों को यह नहीं बताया जा रहा है कि दिल्ली से बाहर सामान भेजने पर फॉर्म भरना पड़ेगा जो कि बिक्रीकर विभाग से मिलेंगा। इसे प्राप्त करने के लिए व्यापारियों से सेवा शुल्क नहीं लिया जाएगा? इसीलिए सरकार को कर प्रक्रिया इतनी सरल बनानी चाहिए जिससे कि भ्रष्टाचार की गुंजाइश ही समाप्त हो जाये।


(यह पत्र नवभारत टाइम्स में 16 मार्च 2005 को प्रकाशित हुआ।)