Friday, 23 January 2015

परीक्षा का तनाव

परीक्षाओं को लेकर विद्यार्थियों में टेंशन कोई नई बात तो नहीं है, पर पिछले कुछ समय से इसने खतरनाक रूप ले लिया है। इसकी जड़ में दो कारण हैं। पहला तो यह कि परीक्षा में बेहतर रिजल्ट लाने के लिए छात्रों पर स्कूलों की तरफ से दबाव डाला जाता है, क्योंकि स्कूलों को अपनी प्रतिष्ठा की चिंता होती है। अभिभावकों द्वारा भी अपने बच्चों को दूसरे बच्चों से आगे रहने के लिए उकसाया जाता है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हर बच्चे में अलग अलग प्रतिभा होती है और हमें उसे जानकार उसका विकास करना चाहिये। केवल एग्जाम में अधिक अंक पाने की होड़ में उन्हें शामिल नहीं करना चाहिए। हमें बच्चों में अच्छे संस्कार भरने चाहिए ताकि वे तनावमुक्त ज़िन्दगी जी सके, अच्छे नागरिक बन सकें और जीवन में आगे बढ़ने के लिए सकारात्मक तरीके से प्रयत्नशील रहें। हम उन पर अपनी इच्छा और सपने न थोपें तो ज्यादा अच्छा रहेगा।


(यह पत्र नवभारत टाइम्स में 28 फरवरी 2005 को प्रकाशित हुआ।