Sunday, 25 January 2015

निराशाजनक बजट

वित्त मंत्री ने एक लाख रुपये तक की आय को करमुक्त करने का झुंझना थमा कर दूसरी अनेक कर रियायतों को समाप्त कर दिया है। वेतनभोगियों और व्यपारियों के लिए भी यह बजट निराशाजनक है। काले धन पर रोक लगाने की आड़ में एक दिन में बैंक से 10 हज़ार से ज्यादा कैश की निकासी पर 0.1प्रतिशत कर लगेगा। यह एक तरह का दोहरा टैक्स है। जब कर देने के बाद वेतन मिलता है तो उस आय को खर्च करने के लिए दोबारा टैक्स देने का प्रावधान आखिर क्यों? यह वित्त मंत्रालय का दिवालियापन ही है। इससे काले धन को रोकना मुश्किल है। यदि वित्त मंत्री काला धन रोकना चाहते हैं तो व्यक्तिगत आयकर समाप्त करना चाहिए, उसके बाद ही कैश निकासी पर कर लगना चाहिए।


(यह पत्र नवभारत टाइम्स में 7 मार्च 2005 को प्रकाशित हुआ।)