Friday, 23 January 2015

दिल्ली का मास्टर प्लान

दिल्ली के नए मास्टर प्लान में पुरानी दिल्ली से थोक मंडियों को हटाने के साथ वहां मेट्रो रेल चलाने का प्रस्ताव है। लगता है सरकार इस बात से नावाकिफ है कि आज पुरानी दिल्ली में रिहायश बहुत कम हो गई है और चारों तरफ मंडियां और दुकानें ही रह गई हैं। थोक मंडियों को हटाकर मेट्रो रेल के विस्तार का कोई औचित्य नहीं है क्योंकि जब दुकानदार, कर्मचारी और व्यपारी ही नहीं रहेंगे तो इस पर चढेगा कौन? सवाल यह भी है कि जहां थोक मंडियां शिफ्ट होंगी वहां मेट्रो रेल होगी या नहीं। इस संबंध में सरकार की नीतियों में व्यवहारिकता की कमी नज़र आती है।


(यह पत्र नवभारत टाइम्स में 25 फरवरी 2005 को प्रकाशित हुआ।