Saturday, 10 January 2015

टैक्स का बोझ

सरकार करों का बोझ बढ़ाने पर आमादा है। अब सर्विस टैक्स के दायरे को बढ़ाया जा रहा है। इसे 10 से 12 प्रतिशत तक करने का प्रस्ताव है। वेट के माध्यम से बिक्री कर को अधिक किया जा रहा है, क्योंकि केंद्रीय बिक्रीकर को समाप्त नहीं किया जायेगा। चुंगी भी बरक़रार है, वहीँ आयकर में लघु बचतों की टैक्स रियायतों को समाप्त करने पर सरकार विचार कर रही है। यह दुर्भाग्यपूर्ण होगा क्योंकि सरकार जनता को कोई सामाजिक सुरक्षा प्रदान नहीं कर रही है।


(यह पत्र नवभारत टाइम्स में 14 फरवरी 2005 को प्रकाशित हुआ।)