Saturday, 10 January 2015

कोरी बेईमानी

'जनता के साथ कोरी बेईमानी' शीर्षक युक्त संपादकीय टिप्पणी पढ़ी। यह बिलकुल सही है कि सरकार हर साल कुछ न कुछ नए कर लगा देती है और अन्य करों में संशोधन करती है जिससे कर प्रक्रिया अधिक कठिन हो जाती है।
सरकार का नोट बदलने का विचार काले धन को समाप्त करने में सहायक होगा, इसमें संदेह है क्योंकि सालों पहले सरकार ने हज़ार रुपये का नोट बंद कर दिया फिर भी काला धन बढता ही गया। सरकार को चाहिए कि उत्पादकर, सेर्विसकर, बिक्रीकर, आयकर, सम्पत्तिकर सब को सरल करे और इन की दरें कम करे जिससे कर चोरी की गुंजाईश समाप्त हो।
पिछले एक दशक में कई सरकारें बदली लेकिन मानसिकता नहीं बदली, उलटे हर साल कर नियमों में फेरबदल कर उसे अधिक कठिन बना दिया जाता है। आज आम व्यक्ति किसी कर प्रक्रिया को कानून विशेषग की मदद के बिना समझ नहीं सकता। सरकार को चाहिए कि जनता को गाय की तरह सीधा समझ कर उस का दूध जरूर पिए लेकिन खून न पिए।


(यह पत्र सरिता जनवरी (द्वितीय) 2005 में प्रकाशित हुआ।)